अंजनेय चालीसा अर्थ सहित — हर चौपाई का सरल हिंदी अर्थ
अर्थ जानकर पाठ करने से क्या बदलता है? अंजनेय चालीसा (जिसे उत्तर भारत में हनुमान चालीसा कहा जाता है) की भाषा अवधी है। यह हिंदी के बहुत निकट है, फिर भी कई शब्द आज के प्रचलन से बाहर हो चुके हैं — जैसे रच्छक , पैसारे , कोबिद , मुद्रिका । इसीलिए बहुत से लोग वर्षों से पाठ करते हैं, पर पूरा भाव पकड़ में नहीं आता। जब अर्थ स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ का स्वरूप ही बदल जाता है। हर पंक्ति एक चित्र बनने लगती है — कभी लंका जलाते हनुमान जी, कभी संजीवनी लेकर लौटते हुए, कभी राम जी के द्वार पर खड़े प्रहरी। पाठ अब दोहराव नहीं, स्मरण बन जाता है। नीचे पूरा पाठ दिया गया है — हर दोहे और चौपाई के नीचे उसका सरल हिंदी अर्थ। ॥ दोहा ॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ अर्थ: अपने गुरु के चरण-कमलों की धूल से मैं अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करता हूँ, और फिर श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ — वही यश जो जीवन के चारों फल (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) प्रदान करता है। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु ...